Thursday, March 26, 2020

मंज़र थोड़े तबाह से - 2020




रूस  का भूकंप 
शहीद होते जवान 
काबुल के आतंकी हमले 
और वायरस के मुँह में आधा जहान 
बंद हो गए कारोबार सारे 
खेतों को भूखा है किसान 
धुंए से मिली चंद दिनों की आजादी 
कयोंकि गाड़ियां  हो गयी है जाम 
दुगनी रफ़्तार में हो रही है मौते 
थम गया है सब और सबकी नींदे 
डर है जिम्मेदारी है 
इतनी हावी 
भविष्य को लेकर है सब हैरान 
कहीं लोग घर में हंस खेल रहे 
कहीं घुट कर जिंदगी ख़तम हो रही 
कल तक जो था खुद का मालिक 
आज शायद लाचार है इंसान ?? 

तब्दील हो गयी तस्वीरें धीरे धीरे अमेजन की राख से 
रुख हवा का फैक्ट्रियों से साँस की तरह लगा रखा था 

कट रहे थे हरियारी विकास के नाम पे 
अरे उसने ही तो बचा रखा था 

सुनामी धरती के वो आंसू है 
और वायरस उसके सीने  में पलता  गंध 

हम इंसानो की अपनी बर्बादी अलग 
हमने तो खुद से ही छेड़ रखी है जंग 

पृथ्वी ही बीमार है हम कैसे बचेंगे 
मिला निवारण ऐसा 
खुद को आईसोलेट रखेंगे। 






(आईसोलेट-अलग करना )

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