जलती हुई जमीं जहा पानी पड़े भी तो तुरंत भाप बन जाए ये गर्मी के मौसम को इसी कदर ब्यान कर रही थी , वो दिन जब हम गर्मी के छुट्टियों में पुरे मोहल्ले शोर मचाते थे ,धुप जब शांत थी और अबकी गर्मियों ने सिर्फ अपनी धुप ही नहीं हमें भी बदल दिए थे , इस मौसम ने हमें दिन का वक़त टीवी वीडियो गेम्स और शाम का वक़त दिया बस खेलने को ,
मै और मेरी बहन इन गर्मियों का पुरे साल भर इंतजार करते थे ,क्यूंकि पुरे साल हमें यही तो कहा गया अभी पढ़ लो छुट्टियों में जितना चाहे खेल लेना ,खैर ये तो रात गयी बात वाली हिसाब थी अब कौन बेल्ट बेलन या झाड़ू खाता बहस करके ,, तृष्णा हमारे पड़ोस में आयी थी अपने बड़े पापा के यहाँ शहर के इंग्लिश मेडियम स्कूल में उसका दाखिला हो गया था पिछले एक साल से कब हम इतने घुल मिल गए मुझे खुद पता ही नहीं चला की मेरी एक ही बहन है ,, आज भी वो दिन याद है जब तृष्णा को उसके पापा यहाँ छोड़ कर चले गए , दूसरी सुबह जब मै अखबार उठाने बाहर आया तो रोने की आवाज आयी कोशिश की मैंने यहाँ वहां नजरे फैला कर आवाज की जगह जानने के लिए , वो आवाज छत से आ रही थी, घर हम दोनों के अलग थे पर छत की सीढ़ियां एक ही थी मैं उत्सुक्ता में अख़बार लेके छत गया तृष्णा दिखीं एक कपडे मुँह से ढक कर बार बार आंसू पोछती हुई ,उसके पास जा कर पूछा मैंने क्या हुआ ?? उसने ना में सर हिलाया जिसका मतलब था कुछ नहीं ,, मै जानता था मै उसका रोना बंद नहीं कर सकता पर थोड़ा कम जरूर कर सकता हूँ ,,, थोड़े समय के अंतराल लेके मैंने फिर पूछा घर की याद आरही उसने हाँ में सिसकते हुए सर हिलाया ,,,
मैंने देखा मोहल्ले में ही नहीं ये शहर के बहुत से घरो की यही कहानी थी ,,कोई हॉस्टल में था कोई अपने रिश्तेदारों के यहाँ ,, तृष्णा उस सुबह के बाद हमसे बहुत घुल मिल गयी थी , हम तीनो एक ही स्कूल में थे इस वजह से हमारी पढ़ाई लिखाई खेलना कूदना सब एक साथ ही होता था ,लुक छुप ,गिल्ली डंडा ,कर्रम ,साइकिल रेस ,वीडियो गेम्स,मूवीज देखना और कभी कभी खिचाई करना ,वो दिन बहुत जल्दी चले गए जब हर दिन तृष्णा की सिसकियाँ सुनने मिलती थी
,मैं अपने स्कूल में पढ़ रहे छोटे छोटे बच्चो को देख कर उनके अंदर की टिस समझने को बेमतलब झुझा रहता था और ये सब बस मुझमे सिर्फ सवाल ही पैदा करती थी की कैसे कोई अपने इतने छोटे बच्चे को अकेला छोड़ सकता हैं ,माता पिता के लिए उनका भविष्य मायने रखता है ,वो सोचते है मायने में बच्चे का भविष्य सुधर जाएगा ,पर क्या हर बच्चा इस लायक हो की वो इन सब में सफल हो पाए ??
,अब वैसे मुझे अच्छा लगता था की उसे घर की याद नहीं आती है ,तृष्णा अब हमारे घर पर ज्यादा रहने लगी थी और यही बात रंज पैदा कर गयी ,,उसके बड़े मम्मी और मेरे मम्मी के बिच एक तनाव जो हमें डांट कर बताया जा रहा था ,,जो दरवाजे हमेशा उसके लिए खुले रहते थे उसके खुद की घर की तरह अब बंद रहने लगे ,, उसकी आवाज अनसुनी कर दी गयी ,,
एक रोज़ यही गर्मी का मौसम परीक्षाएं ख़त्म होने के बाद ,,हम सब मूवीज में मगन थे ,मै मेरी बहन उसके सहेलियां और तृष्णा
,,तृष्णा ,,, ऐ तृष्णा उसके बड़े पापा ने आवाज दिया ,, तृष्णा भाग कर अपने घर गयी ,, उसके जाते ही माँ ने कहा दरवाजे बंद करदो तुम्हे कितनी बार समझाया है ,, मेरी बहन लिली दरवाजा बंद करके आयी ,, थोड़े देर बाद तृष्णा दरवाजे पे आयी उसके दरवाजे खटखटाने को फिर से अनसुना करना था आज हमें ,, पर उसने मेरा नाम लिया पियूष भैया ,,पियूष भैया ... लिली ,,,,,,,,,,
मै गया और दरवाजा खोला ,,ये सोच कर की आने दो ,, पर वो अंदर आने को नहीं आयी थी ,,, आज उसकी चेहरे पे मैंने वो देखा था जो समझाना मुश्किल जरूर था पर मेरा उस भाव को समझना एक अलग अनुभव के साथ बहुत सी चीजे कह रहा था ,, चेहरे पर खुशी के साथ उसने कहा की पापा लेने आये है और मै गांव जा रही हूँ ये कहते वक़्त उसकी आँखे नम हो गयी ,, मै भी तो हमउम्र था ६ वी में मै और 4 थी में वो ,,क्या उसकी यही उम्र थी सिसकने की ?? वो मेरी छोटी बहन की तरह ,,हमसे दूर जाने की उदासी और घर जाने की हसीं चमक दो अलग भाव एक साथ टकराये थे ,और मेरे लिए मेरे भावनाओ की यात्रा का यह पहला उम्दा पल था जो तरुण अवस्था ही तो था ,, ,हम दोनों ने सीखा बहुत कुछ उस दिन।

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