Saturday, March 21, 2020

उदास दिल देख बिलख जाता हूँ








एक  अजीब सी ख़ामोशी के हर दिन पल्ले पड़ जाता हूँ 
बेनकाब होते चेहरे ही नहीं ,उठते परदे से भी डर जाता हूँ .♡♡♥️


बड़ी मोहिनी है दुनिया के अदायगी  की 
नाकाम कोशिशे है तमाम 
पर फिर मैं  इन्ही में सिमट जाता हूँ ♡♡♥️


सिखाते है रोज यहां के लोग मुझे 
जो खुद में है उसे मारना है कैसे♡♡♥️

और उसे , भीतर जगाये रखने के कवायद 
में सहूलियत से बार बार बिखर जाता हूँ ♡♡♥️


बगावत नहीं उलटे रास्ते पे चलने के  लिए 
पर उन मशरूफियत पे उदास दिल देख बिलख जाता हूँ।  ♡♡♥️










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