Sunday, March 15, 2020

विचारों की समाधि - Sepulture of Thoughts

     मैं  एक विचारधारा हु ,, 
  मैं  लोगो को तय करता हु लोगो के सफलता से लेकर उनकी असफलता तक ,उनके समृद्द से लेकर तबाही तक ,  जो उनके पीछे होता है वह मैं  हूँ। .. मेरे ही द्वारा लोगो अपनों व दुसरो के प्रति अवधारणाएं बनाते है ,, कभी मैं  बार बार बनता हु बार बार बिगड़ता हु ,तो कभी सिमित तो कभी ऊँची दर्जे में पहुंच जाता हु।  और ऐसा बहुत काम होता है जहा मैं  निश्चित तौर पर किसी एक मत पर टिका रहुँ  .,


ज्यादातर तो मैं  स्तिथितियों पर ही निर्भर रहता हु मनुष्य के दिमाग में मेरा आना किसी स्तिथितियों की ही देन  है।

मुझे उजागर करने की तरीके भी जमाने के साथ बदल गए जहा पहले मैं  कही शांत ढेलो में था तो कहीं नियम  धर्म  के चपेडो में ,अब धीरे धीरे मैंने कई बदलाव देखे ,क्रांति ,उदासी ,जबर्दस्स्त  खुशी ,ये सब मेरे ही द्वारा उत्पन्न होती है या कहो मुझसे ही पैदा होती है।  मई अब आधुनिक हुआ जा रहा हु  ,,, अख़बार ,टेलीविज़न। सोशल मीडिया। पर मुझे कई प्रकार से दिखाया ,पढ़ाया ,सुनाया जाता है ,यहाँ पर भी मै लोगो में हर सेकंड बदलता रहता हु किसी किसी व्यक्ति में।  

आखिर क्यों हमें विचारों को भी शिक्षित करने की जरुरत है








मै सिर्फ तब तक ही लम्बे समय तक चलता हु जब मैं परीस्थ्तियोँ में अपनाया जाता हुँ।  और आज भी जो पुराने मत वाले विचार आपको कही देखने को मिलेंगे तो वह भी किसी परम्परा , समाज ,कठोर रंज ,आपसी समझ या फिर ,खुले दिमाग की वजह से। वैसे तो मेरे कई प्रकार है पर जो सबसे ज्यादा मायने रखती है वो है सिर्फ दो ही चीजे , कहने को बहुत छोटी चीज हु मैं  , मुझ पर सही तरीके की चुनाव और मुझ पर जीत करना जितना आसान है उतना कठिन भी  ,

मैंने ( विचार ) खुद को लोगो पर सिद्धः करते हुए भी देखा है ,,,. लोग ऐसा करके काफी लम्बे समय की खुशनुमा अहसास करते है।  बुरी तरह से भर कर लोग मुझे खुद पर भी बुरा असर डालते है।  

जहा मैं  शांत हु अच्छा हु सीधा और साफ़ हु वह मैंने खुशियां , शांति ,अच्छी माहौल ,सकारात्मक देखी  है मैंने बुरी विचारो की वजह से माहौल में ईर्ष्या ,दुःख,जलन ,नकारात्मक , संकी ऊर्जा भी देखा है।  

ऐसा कभी जरुरी नहीं था की मेरे अच्छाई सुखद सुद्ध विचार हर बार सफल हो ,ये काम पूरी करने की ताकत जरूर रखते है ,पर  कुछ में मैं  ऊपरी परत की तरह हु तो कुछ व्यक्ति में मैं एक गहराई में दफ़न हूँ। 

और कुछ के पास ऐसे भी हूँ की कोई अंतर ही नहीं है , सुनकर मुझे आप स्पष्ट भी हो सकते है या दुविधा में ,खुसी में ,दुःख में भी जा सकते है।  





अंत में मैं  यही ब्यक्त करूंगा की -
मेरी समाधि की बेहतरीन पृष्ठ  वही मिलेगी जिसके पास से आपने मुझे सही तरह से सुना होगा जो होता तो बहुत कम है ,या फिर उनके पास जिसने बिना मुझे सुनाये सामने उदहारण पेश किया हो।  



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