हमें मुन्तजिर था की हमारी खैरियत पूछी जायेगी
खबर क्या थी की हमसे हमारी गुस्ताखी पूछी जाएगी
बेसबब को मुलाकात ही जरिया बना जब भी
इत्तेफ़ाक़-ए-फ़क़त हमसे सिर्फ लिहाजे पूछी जाएगी
हुनरमंद तो नहीं बस अलफ़ाज़ के ठिकाने मिले
कसम वादों में बेक्कार ही परवाने मिले
रसूख था बस इश्क़ का ,महरूम ने ऐतबार रखी
जहन में मक्कार लिए उन्होंने अपनी आगाज़ रखी
वो गैर थे गैर ही रह गए ,किसी लफ्ज़ के शोख थे
सुकून की फ़रियाद उनकी अब बेवजह हो जाएगी ।

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