तलाश और तिशनगी। ...
♥️ डर नहीं खरोच यकीं बेहिसाब रख रहे की
जला देती है अक्सर आग वो
♥️ फक्त अब चिंगारी सा हो गया है
फिर संगीन गुस्ताख़ के नज्म में सिद्दत
♥️ नए पलकों पे रख रहे की
आबाद होना साजिश सा हो गया है
♥️ बुनियाद बेबाक कही तरसते थे
सफर संजीदा सुर्ख बिलखते थे
♥️ बेपरवाह भटकते कहीं तलाश और तिशनगी
मुखड़ा जिंदगी का मुहब्बत रख रहे की
♥️ अंतरा नायाब होना लाज़मी सा हो गया
♥️ डर नहीं खरोच यकीं बेहिसाब रख रहे की
जला देती है अक्सर आग वो
♥️ फक्त अब चिंगारी सा हो गया है
फिर संगीन गुस्ताख़ के नज्म में सिद्दत
♥️ नए पलकों पे रख रहे की
आबाद होना साजिश सा हो गया है
♥️ बुनियाद बेबाक कही तरसते थे
सफर संजीदा सुर्ख बिलखते थे
♥️ बेपरवाह भटकते कहीं तलाश और तिशनगी
मुखड़ा जिंदगी का मुहब्बत रख रहे की
♥️ अंतरा नायाब होना लाज़मी सा हो गया

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