नैनो की नम पीरह पढ़ी नहीं जाती
जिस्म से ही बस जिन्दा क्यों है लोग
चीखता ही रह जाता है मासूम आवाज कहीं
बेमतलब के शोर में खुश क्यों है लोग
ये विधान है क्या कोई
ये विधान है क्या कोई
इनमे इल्म तो दिखता नहीं
जरुरी है कठोर हो जाना गर
तो
नम करती नैनो को, वो पिरह
रखते क्यों है लोग ??
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