Friday, December 18, 2020

विकास की बात भी हमारी तस्वीरो से और पिछड़े हुए लोग में भी हमारी तस्वीर.

 

credit-fatemfiles.wordpress.com

जिनकी तस्वीरे से सजा है आज डिजिटल मीडिया से लेकर अख़बार और मैगज़ीन पुरे दुनिया में क्या उन्हें पसंद है कि कोई उनकी तस्वीर निकल ले उनके मर्जी के बिना, उनके इलाको में उनके घर में उनके दैनिक कार्य के बीच में क्या उन्हें पसंद हैकि कोई उनकी तस्वीर उनके काम करते वक़्त निकल ले.

भारत देश के हर राज्य अपने अलग प्रकार की संस्कृति के लिए काफी मशहूर है, चाहे वो मध्यप्रदेष हो राजस्थान हो या छत्तीसगढ़ का बस्तर, की अनूठी जाती और यहां के अंदरुनी इलाको के लोगो को खबर ही नहीं की उनकी तस्वीरो को कहा कहा और किन् अखबारों में लगाया जा रहा है, सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरो को फ़िल्टर लगा कर लाखों लाइक्स शेयर पाने वाले पेज एडमिन और वेबसाइट के मालिक का कभी उनके नाम तक उजागर कर पाये है

अगर बात मानविक तरीके से देखा जाए तो यह बात शायद किसी को नहीं पसंद आएगी की कोई घूमते हुए यह कोई दैनिक कृत्या करते उनकी तस्वीरें निकाले जाहिर सी बात है क्या आपको यह बात अच्छी लगेगी की आप अपने काम में व्यस्त है चाहे वो कोई भी काम हो और अचानक आपकी तस्वीरें ले ली जाती है, उसके बाद आपको पता हि नहीं चलता की आपकी तस्वीर किन अल्फाज़ो के ऊपर रख कर उनके विचारो को बेपर्दा कर  रही है, 38 साल की मेंती बाई जो नारायणपुर के पास गांव में सब्जी बेचकर अपना घर चलाती है उनका कहना है की बहार से आये लोग के लिए हम नए है, कुछ लोग पोज़ करने को कहते है, विकास की बात में हमारी तस्वीरो से और पिछड़े हुए लोग में भी हमारी तस्वीर, सरकार की बात ही छोड़ दीजिये, आम नागरिक जो ज्यादा दूर अंचल के नहीं होते वो भी हमारे साथ इस तरह का बर्ताव करते है,   कई बार हमारी बहु बेटियां गाँव के होने वाले किसी उत्सव में जाने से बचती है, अब क्यूंकि हमे मोबाइल का कुछ पता टीवी के बारे में ज्यादा रूचि रखते है तो क्या हमें एक सजाने के नाम मात्र की तरह कैसे व्यवहार कर सकता है,

हमारे देश में शुद्ध रचनात्मक गतिविधियों और निजता का उल्लंघन करने वाले कानून को अलग से भली भांति परिभाषित नहीं किया गया है। लेकिन यदि कोई व्‍यक्ति जानबूझकर अनैतिक तरीके से किसी की तस्‍वीर लेता है, तो उसे उत्‍पीड़न की श्रेणी में रखा जाएगा। किसी सार्वजनिक क्षेत्र में ली जाने वाली तस्‍वीर में अनजाने में आए लोगों की तस्‍वीर आपके लिए खतरा नहीं है किंतु यदि यही काम आप जानबूझकर करते हैं तो आपको कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सकता है।

Thursday, November 26, 2020

मैं चूतियों का साथ निभाता चला गया

 


मैं चूतियों का साथ निभाता चला गया 

मैं चूतियों का साथ निभाता चला गया
फिक्र थी नहीं किसी को 


मैं फिक्र ऐसे ही उड़ाता चला गया
आबादियों का शौक था
मैं शौक अपने इश्क़ का दबाता चला गया

ज़ज़्बात बताना यहां फज़ुल था
सिद्दते परवाह जताना फज़ुल था

सिमट के अकेला मैं जश्न मनाता चला गया

जो था गैर उसे भी इंसान समझ लिया

इंसानियत जो भुला उसे भुलाता चला गया

आंसू से खेल कर हंस दिया जहां
लब पे अपने सितम छिपाता चला गया

मुकाम का नशा था, मकान धुंद थी
मैं काम के इशारे में सांस चलाता चला गया


remake version of " main jindagi ka sath nibhata chla gya" sung by Muhammed rafi and lyricist by - sahir ludhianvi. 

c@waakifiyat

अक्ष आलिंगन



आज कई दिनों बाद अपने बेटे से मिला लॉक डाउन के बाद मेरी टाइल्स की दूकान वैसे बंद थी और मैंने सोचा था की छोटा बेटा भी अगर घर आजाये तो बेहतर होगा मुझे उससे बातें करने का मौका मिलेगा, 

हमेशा से मैं चाहता था की ज्यादा से ज्यादा उनके साथ  समय बिताऊं , 

एक उम्र में उनकी माँ जब हम तीनो बाप बेटे को छोर कर गयी तो मैंने भी दोनों बच्चो की परवरिश में और ज्यादा ध्यान देना चालू कर दिया 

बड़े चाचा जी घर में एक लौते बुजुर्ग थे उन्होंने दूसरी शादी करने को कहा पर मन माना  नहीं मेरा, 

हालाँकि शादी मैं  करता भी कैसे, विशु और जिशान्त में अब मुझे परिवार समेटता हुआ बेहतर लगा। 

खैर , घर की जिम्मेदारी और अपने व्यापर में मशगूल होते होते मैंने बस जिम्मेदारियां साड़ी निभाई फिर भी जब बच्चे मुझ से अपनी बात नहीं कह पाते थे तो लगता था शायद अब भी मैंने कहीं कमी करदी हो, 

और एक बाप बनने के बाद सबसे ज्यादा इस चीज की खलिश मुझे अब कहीं और धकेल रही थी,

शायद यह हर किसी के साथ होता हो या ना होता हो

शायद हर आदमी मेरी तरह सोचता हो या ना हो पर मैंने अपने दोस्तों में भी यही देखा 

स्कूल टाइम से ही विशु काफी समझदार और सलीके से रहा करता था, बिलकुल अपनी माँ की तरह सुलझा हुआ 

और जिशान्त 

जिशान्त के बगावती तेवर देख कर मुझे अपनी बचपन याद आती थी 

वैसा ही झगड़ा वैसा ही गुस्सा वही बचकानी हरकत और बहुत सारे भावनाओ का छुपा कर रखना 

उसे संभालना मेरे बस में कबि नहीं रहा 

न की तब जब वो छोटा था 

ना अब 

उसकी जिद्द थी उसे अपने दोस्तों के साथ वाले कॉलेज में जाना है और वही बहार रहना है

मैंने कोई बहस नहीं की

जिशान्त को देख कर मैं खुद के स्वाभाव से भी रूबरू होने लगा था , 

जो मैं जो  था जो मैं  हूँ और जैसे मैं रहा करता था, अड़ियल सा 

पर इनदोनो की माँ थी जो मुझे जानती थी मुझे समझती थी और पता नहीं क्या जादू करके मुझे शांत कर  देती थी

पिताजी को रीना पसंद थी वो भी उन्हें माँ की तरह लगती उन्होंने पहले तो मना किआ पर उसके घर आने के बाद जैसे वो उसकी ही तारीफ़ करने में लग जाते थे 

कई बार जिशान्त को गोद में खिलते हुए वो मुझसे कहते 

ये तेरी तरह है और तुझसे भी ज्यादा परेशां करता है देखना एक दिन यह तुझे बताएगा की तुम है कितना परेशां करते थे 

और फिर रीना कहती - पिताजी आप टेंशन ना लो जिशान्त आपके बेटे जैसा ही है भले  अड़ियल पर मुहब्बत से भरा हुआ 


टेबल पर चाय ठंडी हो गयी इतने में विशु नाहा कर आया और बोलने लगा - पापा चलो 

हम दोनों जिशान्त को लेने गए उसके कॉलेज हॉस्टल 

विशु ने गाडी निकाली और मैं अब सोचने लगा था की पता नहीं जिशान्त क्या रियेक्ट करेगा 

हमारी दो साल से बात ही नहीं हुई विशु से जिशान्त की घंटो बात होती पर मुझसे वो हमेशा खफा सा रहता 

मेरी हर बात उसे ताना लगती 

जिद्द उसका देख कर अब मैं समझने लगा था आचरण तो मेरा भी वही था फिर पिताजी क्या करते थे उन्होने मुझे कैसे संभाला मैंने भी वही किया उसकी हर जिद्द पूरी की उसे रोकना टोकना बंद कर दिया 

और यही जगह मुझे लगता था की 

अपना अक्ष भले मजबूत हो या कमजोर जब तक उसे हम अपने पर होते नहीं देखते हम खुद को काफी उम्दा ही समझते है 

माँ ने संभाला क्यूंकि मैं उनका बेटा था वो समझाती दुलार से सहलाती रीना के आने के बाद वो मुझे और मेरे व्यवहार को बर्दाश्त करती 

और अब जब मैं  जिशान्त को देखता हूँ 

लगता है भगवान मुझे ही परोस दिया है मेरे लिए ताकि मुझे भी पता चले मैंने क्या किआ और मेरे साथ वालो को क्या तकलीफे हुई 


और जैसे मुझे प्यार से मनाया जाता था, समझाया जाता था मैं इतना जान गया था की जिशान्त को भी प्यार से समझाया  जा सकता है 


अचानक विशु ने गाडी रोकी और कहने लगा पापा आप याद कर रहे हो क्या जीशु को ?

मैंने बोला - हाँ बेटा, तुम्हारे जनरेशन में शायद ओपन उप होना इजी होगा बाकी लोगो से काश तुम अपने लोगो से ओपन उप हो पाते थोड़ा कोसिस कर पाते 

विशु ने कहा - पापा मैं समझता हूँ आपको, और मेरी आपकी बात अच्छी होती तो है जीशु को लेकर आप टेंशन मत लो वो भी आपसे बहुत प्यार करता है बस बोल नहीं पता एकदम आपकी ही तरह यही वो 

मैंने कोई जवाब नहीं दिया 


विशु की यह बात मुझे लगी, सायद जिस पर मैंने कबि ध्यान नहीं दिया और इतना बोलते हुए वो नाश्ता लेने चले गया 


अब मुझे लगने लगा था की शायद मुझे खुद पर थोड़े बदलाव करने होंगे 

मैं अब खुश था की मुझे कोई तो उपाय मिला 

विशु के साथ नाश्ता करने के बाद हम निकल पड़े और अब एक गहरी झपकी मार ली 


हॉस्टल में जाने से पहले मैं मुस्कुराया, 

हम रिसेप्शन ऑफिस के पास थे और विशु जिशान्त के साथ बैग पकड़ कर आ रहा था 

जिशान्त को देख कर मैंने हलकी सी होंठ फैला कर स्माइल दी 

हालाँकि मन तो कर रहा था ठहाके मार कर हसु 

उसका चेहरा, वो तेज़ आँखे और वही अड़ियल स्वाभाव दीखता  हुआ उसका चलन 


उसने मुझे देखा मेरे पैर छुए और गाड़ी की तरफ चला गया 

मुझे उसका यह व्यवहार अंदर से खा गया 


हमने हॉस्टल की रजिस्टर में sign किये और अब मुझे समझ आ गया  की अब भी जिशान्त  मुझसे गुस्सा है 


पुरे रास्ते मैंने सोचा बात करू उसका  हालचाल पुछु 

 

पर विशु ने हालत की डोर संभाली और मेरे हिस्से की उत्लाहट को कम कर दिआ 

उसने 

जीशु से एक एक करके सवाल पूछने चालू कर दिए 


कैसा चल रहा 

पढ़ाई 

दिवाली में क्यों नहीं आया 

फीस सही पे कर रहा की नहीं 

पैसे  कम तो नहीं पड़ते 

घर में सब तुझे याद करते है वगेरा वगेरा 


और इन सबका जवाब देता 

तो हल्कापन मुझे महसूस होता 

 

 

 



Wednesday, May 27, 2020

दिन की पहली कमाई






   सब्जी बेचने का काम तो मुझसे शायद कभी नहीं हो पायेगा, ठंडी में चाय और समोसे, 
बारिश के मौसम में घर पे थोड़े दिन की जिंदगी बसर हो जाती थी. और अब नया सामान बेचना जैसे नए धंदे में घुसना। सीतारिन बाई से तो हमेशा से मेरी झड़प ही हुई बाजार  को लेकर मेरा ठेला उसकी छोटी सी चौपाई अब मैं ठहरा बाहरी राज्य का और सीतारिन काकी मंझी हुई व्यापारी उनसे दुश्मनी भी नहीं कर सकता और ये कोई भी नहीं करता पुरे बाजार में ऐसी औरत जिसकी स्वाभिमान की चर्चा अपने चने के भाव कभी कम नहीं किये भले ग्राहक आये ना आये और व्यापार का पहला उसूल तो उसने बखूबी तोड़ के खुद के व्यापार को इतना बड़ा किया। 
मेरा वापस ओडिशा जाने का प्रबंध आखिर हो गया था बहुत मुश्किल के बाद, कितनी दौड़ भाग के बाद  अपने बड़े भैया के पास  जमापूंजी भेजवायी, 
वो तेलंगाना में फसे थे , हालाँकि फसा कोई नहीं था सब जीवन बसर करने के अपने मजदूरी तरीके से यहाँ वंहा राज्य में गए थे।  बड़े भैया का ओडिशा जाना बहुत  जरुरी था क्यूंकि लॉक डाउन में उन्होंने  पहले ही सारे पैसे माँ को भेजवा दिए थे।  कुछ महीने तो निकल ही गए पर भैया का घर जाने का जिद्द मुझसे देखा ना गया, 

हालात सच में बहुत ख़राब थी 

उनके कुछ दोस्त के रिश्तेदार घर जाते वक़्त ही भूख  और गर्मी में मारे गए ,  एक दोस्त ने आत्महत्या कर ली.
 
मजदुर शब्द पहली बार इतनी महीनो तक अखबारों में छपा रहा पहले भुगतान को तरसता मजदुर या काम या फिर आत्महत्या करते मजदूर 

इस बार नया था "प्रवासी मजदूर "

2009 में भैया तेलंगाना चले गए उन्हें गोदाम में  मजदूरी की काम मिली थी। ओडिशा में आये भूकंप से पिताजी की अपनी दूकान धवस्त हो गयी खबरों में छपा रहा की सरकार बाढ़ पीड़ितों को पैसे मकान दिलवाएगी '
  इंस्युरेन्स होने के बाद भी दूकान के बदले की पैसे नहीं मिले कागज़ी काम में उससे ज्यादा पैसे लग गए थे 
बहन और छोटा भाई उस वक़्त महज़ 5 , 7 साल के थे।  पिताजी बैंक और मुआवजे की रकम के लिए दफ्तर घूमते घूमते अपनी आखरी सांस को गिन लिए। 

भैया ने तेलंगाना जाते ही घर की हालत संभाल ली  पर सोचा के अकेले जाने से भार सारा उन पर है छोटी बहन मिताली और चीकू को आगे तक पढ़ाया जा सकता है भले हम ना पढ़ पाए तो क्या इसी सोच ने मुझे भी पढ़ाई छोड़ कमाने पे मजबूर कर दिया 
 
2010 में मै अपने दोस्तों के साथ छत्तीसगढ़ आया 

शुरुआत बहुत अच्छी हुई बाजार में पूरा दिन बित जाता, एक साल फल की दूकान में काम करने के बाद मैंने खुद का काम शुरू किया , चाय की टपरी कॉलेज के पास फिर गर्मियों में तरबूज की दूकान।  


लॉक डाउन इस चरण में अब मेरी भी हिम्मत  जवाब देने को है , तीन महीने में जमापूंजी अब ख़तम ही हो गयी 
ख्याल आया की सीतारींन बाई से मिलते हुए घर चला जाऊ.

आज बाजार का समय बस सुबह 7 से दोपहर 3 बजे तक है . परसो के लिए एक ट्रक ड्राइवर से बात हो गयी ओडीशा जाने को. 
 ये क्या ऊर्जे से भरा तेज चेहरा आज उदास सा है 
मैंने जा के पूछा काकी का कर रही हो 
उसने धीरे से कहा - का करे, समय है ना पैसा घर का राशन ख़तम होने  को है 
सूना है तू घर जारा बड़ा तैयार है आज तो 
हां जी काकी माँ परेशान है और मेरा धंदा भी मंदा है 
तूने सूना क्या काकी तेरे लिए एक खबर लाया मैं 
सीतारींन बाई - सूना दे खबरीलाल 
सरकार ने कहा है लोकल वोकल जैसा कुछ जिसमे स्थायी व्यापारी लोगो के सामान को तरजीह देने को जनता से कहा है. 

काकी अपने टोकरी से चने और पुराने लगी (सामान और डालना ). 
कुछ कहने ही वाली थी की एक 
ग्राहक तेज तर्रार अपनी गाड़ी दौड़ाते आया और पूछा - दाई चने कैसे लगाये ?
काकी - 10 रुपया बाबू 
ग्राहक - 8 में दे दो 
काकी ने एक पैकेट निकाला और पैसे लेकर  थमा दिए । 
पैसे डब्बे पे डाल कर कहने लगी 
के बोल रहा था तू सरकार स्थायी व्यापारी ?
मैं गाँव से यहां सुबह से आयी हुई हूँ , चने विदेश से तो ना लाती 
मेरे ही खेत के है 

 मोल कम ना करती तो ये भी नसीब ना होता 
दूकान के 500 की प्रोटीन पावडर  सस्ती है 
मेरे खेत के चने काफी महंगे है।  
दूकान बंद होने को है अब पुलिस आती ही होगी 
ये आज के 8 रूपये ही मेरी पुरे दिन की पहली कमाई है। 













Monday, May 11, 2020

मंटो के वो विचार जो गहनता को दिखाते है - सआदत हसन मंटो



                        मंटो के वो विचार जो गहनता को दिखाते है 
                                                                                --- सआदत हसन मंटो 






सआदत हसन मंटो एक क्रांतिकारी लेखक के रूप में जाने जाते थे चाहे वो सामाजिक कुरीति को लेकर हो या आजादी के समय में होने वाले लड़ाईयो को लेकर ,,
सआदत हसन जी का जन्म पंजाब के लुधियाना में 11 मई 1912 को हुआ , वे एक मशहूर लेखक ,नाटककार थे
जिनकी मुख्य रूप से भाषा उर्दू थी ,
उनके कई लेखो के वजह से उन पर मुकदमा चलाया गया।
मंटो मेरे पसंदीदा लेखकों में से एक है , इनके लेख से इनके विचार का पता चलता है जिन्होंने हर कदम में हकीकत से रूबरू करके अपने लफ़ज़ को बगावती अंदाज़ दिए है ,
यह सच  भी है की बिना बगावत वा क्रांति के चीजे बदली नहीं जा सकती , उनके द्वारा लिखी गयी 'ठंडा गोस्त '
काफी बेहतरीन लेख में से है।

उनके विचार गहनता और वैचारिक रूप से बेहद संवेदनशील थे
उनके द्वारा कहे गए कुछ विचार आज भी लेखको व साहित्य में जिन्दा है ,



                1. 













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Wednesday, May 6, 2020

प्रेम पर भगवान बुद्ध के विचार

                 




भगवान् बुद्ध एक अध्यात्म गुरु थे , उनके विचार उपदेश से कई  लोगो के जीवन में बड़े बड़े बदलाव आये , उन्होंने जीवन ,जीवन की समस्याओ व समाज मनुष्य व्यवहार पर कई विचार व्यक्त किये व उपदेश दिए ,
वे  दुनिया में बहुत जगह घूमे दुनिया भर में अपने अध्यात्म ज्ञान से मनुष्यो के अन्धकार जीवन में ज्योति भरे ,
उन्हके कई उपदेशो में से कुछ चन्द शब्द प्रेम पर -


































टैगोर जी के गीतांजलि लेख से कुछ चंद शब्द -

                               🎔🎔टैगोर जी के गीतांजलि लेख से कुछ चंद शब्द - 🎔🎔





रविंद्रनाथ टैगोर जो न ही सिर्फ एक लेखक थे बल्कि मशहूर दार्शनिक ,नाटककार ,संगीतकार भी थे , 
साहित्य जगत में उनका नाम विदेशो में भी फैला हुआ था , आइंस्टीन और टैगोर जी के वार्तालाप को 'Note on the nature of reality ' का नाम दिया गया , 
 यही नहीं उनके लेख से बड़े बड़े नेता वैज्ञानिक भी अभिभूत  हो उठते थे।  
                                                           रबीन्द्रनाथ टैगोर जी ऐसे पहले नॉन-एसीएन थे जिन्हे साहित्य में नोबल प्राइज मिला , उन्होंने नोबल प्राइज के पैसो से शांतिनिकेतन स्कूल खोलवाये।  उनकी तीन बेटियां व दो बेटे थे। 
उनके लेख जीवन स्मृति और गीतांजलि हिंदी साहित्य के साथ बांग्ला में भी बहुत प्रचलित हुई , 
न ही सिर्फ हिंदी बल्कि उन्होंने तीन राष्ट्र गान  भी लिखे व राष्ट के हित में सहयोग दिए।  

टैगोर जी के ' गीतांजलि 'लेख से कुछ चंद शब्द- 

 1.             '' मेरी ऋघा भारी है मेरी विफलता बड़ी है मेरी लज़्ज़ा गुप्त है और हृदय को दबाये देती है 
तथापि जब मैं अपने कल्याण के लिए याचना करने आता हूँ तब मैं भय से कैंप उठता हूँ की कही मेरी प्रार्थना स्वीकार ना हो जाए "


2.             ''अगर मैं अपनी प्रार्थना में तुझे नहीं पुकारता अगर अपने हृदय में तुझे धारण नहीं करता तब भी तेरा प्रेम मेरे प्रेम की प्रतीक्षा करता है '' 


3.             ''मेरे साथियों ने मेरी हंसी उड़ाई और घमंड से सर ऊँचा किये हुए तेजी से आगे बढ चले गए उन्होंने पीछे की ओर एक बार भी नहीं देखा और ना ही अभिवादन किया , थोड़ी देर में सुन्दर निल छाया में हपति से छिप गए , उन्होंने अनेक मैदानों और पहाड़ियों को पार किया और कितने ही बड़े बड़े देश उनके रास्ते निकल पड़े , वीर यात्रियों तुम धन्य हो , 

                            उपहास और निंदा ने मुझ में उठने का आग्रह किया परन्तु मेरे हृदय ने एक ना मणि मैंने अपने आपको रमणीय वृक्षों की छाया के तले आनंदमय अगाध आगौरव में निमग्न कर दिया। 

4.              '' मुझ में तुम्हे भरपूर आनंद आता है , इसलिए अपने ऊँचे शासन से तुम्हे नीचे उतरना पड़ा है , हे सर्वभुनेश्वर यदि मैं ना होता तो तेरा प्रेम कहा होता।  

                                                                        🎔🎔

                                             टैगोर जी प्राकृतिक प्रेमी थे , यही नहीं अपनी पत्नी मृणालिनी को वो प्यार से मीनू कह कर पुकारते थे , एक लेखक होने के साथ साथ अति संवेदनशील होना हर मनुष्य की बात नहीं होती , रबीन्द्रनाथ टैगोर जी के लेख यह दर्शाते है की एक विचार किस हद तक आपको कई चीजों से  रूबरू कराती है।  








Friday, April 17, 2020

लॉक डाउन with विचार




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Main aur meri Bhabhi ki bahut acchi banti hai halanki wo mere cousin brother ki wife hai aur bhabhi ji ke husband yaani mere bhaiya jinse meri baat na ke barabar hoti hai , 
bhabi meri choti bahan ki tarah hai aur ghar me eklaute hone ki wajah se mai ek bhai se jyada ek bahan ke hone ko miss karti thi bhabi ko maine hi bhaiya ke liye pasand kiya tha kyunki bhaiya aur meri tab acchi bnti thi kya pta tha bhaiya hi galat honge aur bhabi sahi , 

bhabi ek join family se belong karti thi , unke usul unke niyam dharm se mai acche se waakif thi , jinme se 90% dakiyanusi baaten .mujhe unhe smjhaane me pahle waqt lgta tha 

ghar baar ki life me itni vyast aur itne acche se sambhal rahi thi par isi bich bhaiya ka interest kahi aur ho gyaa 

bhabi tut gayi mujhe phone krke roti rahi , bhabi ke bhaaiyo ne to kayi baar dhamki di aur use apne sath ghar le gye ,

mai khilaf hoti to baat ghar ki ghar se bahar jaati ..

waise mai kayi baar khdi hui unke sath , 

ab sab shant tha ,ham ghanto bh baat krte wo hamesha har do din me bhaiya ke haalchaal puchti aur mai use hamesha smjhati ki aap pyaar me ho isliye koi action nahi le rhe wo khti ki sb samay dega uske do tarfe baato se mujeh wo confuse hi lagti thi 

bahut time ho gaye the unse mile sochi do din bhabi ke mayke se hoke aajati hun . 
wo modern khayalo wali nahi thi ham dono ek dusre ke bahut opposite the , 
maine kabhi ghar grishati wale life me kayi mahilao ko dekhe khuskismat thi jo shadi ke baad bhi khush thi wo bas 10 percent hi hai 
baki jo bache 80% unki kahaniyaa bahut similar thi ,shadi ke phle ke nakhre husband palko me leke ghumte hai 
uske baad pairo pe ...

kya pta thaa bhabhi se milna bhgwaan ko itna pasand aagya ki ham do saal baad mile aur lock down chalu ho gyaa , 

meri logo se duri hi bna k rakhti thi , bahut kam logo se ghulna milna ,aur jinse ghulo milo wo log hi bahut kam the ,

bhabi mere ulat sbse pyaar bhra behave hasi khusi n all , tane sun lo , ye krdo wo krdo wgr wgr , 
kabhi mujhe baate bta bta kr ro deti .
hmare bhabi nanad wale rishte se bhaiya ko pareshani hoti thi kyunki bhaiya pahle mere apne the par agar wo galat hai to apna kahne me mujhe harz to hoga hi ,,, 

bhabi ki saheliyaan aas paas bahut thi wo sab bhabi ko bahut pasand krte , 

is lock down me bhabhi aur unke parivaar ke saath bahut maja aarha tha ,
aaye din daily nye nye time pas ke tarike to kabhi sara din kaam me vyast ,kabhi saath me antaakshari carrom ,chay pakode,nye dishes , waah waah .

mai nuclear family se belong karti thi aur 
mere liye join family ki alag hi definition thi ab tak 

bhabi ke gossip bdi mumi ke purani kahani , bde papa ke akhbaar ki comedy news reading , bhabi ke bhai rishi ke alag cartoons , kabhi puri raat bhabi ke gossips ....

main unhe itna khush apne bde papa ke ghar nahi dekhe ( Sasural me )

unhe itna khush dekh kar maine unse pucha - kyaa aapko lgta hai maine aapki life waste krdi aapko bhaiya ke liye chun ke ?

aur wo khti ki - kya tumhare bhaiya ko mai pasnd nahi ?
mai kahti - nai bhabi wo aapko phle pasand kr liye actually mai apko dekh ke samjh gayi thi , aap is family me adjust nahi ho paoge , maine bhaiya ko bole bhabi aapse umra me choti hai aur jo aap phle dekhe wo aapke liye perfect thi , 

bhaiya ne aapek liye haa kiye 

bhabbi ne fir puche - to tumhe mai pasand nahi ?

maine has kar kaha - aap ko mai dekhte hi smjh gayi thi bhabhi aap apki family aur maine apni family ke hisab se kaha ,,aap yhaan jitne khush ho aur aisa hona chahiye ki ladkiyaan jahan shadi krke jaaye wo jagah me isse jyada khush rhe ?
kya bdemum bdepapa ko accha lga jaan ke jo aapke sath hua ?
kyaa aap aisa chahegi ki aapki beti 

bhabi-chup rah bahut baat karti hai tuh 
 maine unhe thodi der dekha aur uske chehre sse ye saaf tha ki wo bhi is kmi se jujh rahi hai kahi wo bhi band hai aur kahi rivazo me fas gayi hai , 


mai uth kar chay bnane chli gyi ,, 5 bjne ko the aur rishi bhi anytime kitcen me masti krta tha ..

agle shaam bhabi apni pados ke shaeliyo se baitya kar aayi aur unka gossips session chalu hua ..

wo apne ek saheli se jo sun kar aayi dusre ke bare me aur mujhe btane lagi 
tumhe pta hai leena mausi ki beti pyali jiski shadi me ham tum tere bhaiya sab aaye the ?
maine kaha haan- woh kya hua unko 

bhabi - are teko ptaa hai lock down me uska alg hi chl rha hai sb bol rhe hai aisa 
aise ki ghar pe saas sasur sabko kaam karwa rhi hai 

maine turant kaaha - isme galat kya hai bhabi ??
                                 kyaa pta sab sath mil kr kar rhe ho kaam ,hamne to baat nahi ki ham kaise janenge waha kya ho rha hai ?
                                 aur ho skta hai kuch gharo me sirf akele superwoman banne ki koshish me thak haar ke baithi ho udaas 

ek bda sannata tair gyaa ham dono ke bich ,,,













सफऱ - Divine Suffer 1 ( गुस्से की उम्र )







रायपुर में गर्मी की शुरुआत हो गयी है ,ये प्रतिदिन के दिनचर्या से अब थोड़ा गायब होने का दिन आ गया है , माँ ने कुछ दिनों के लिए घर बुलाये है और अब मुझे जल्दी तैयार होना था , बीजापुर जाते तक सुबह हो जाती थी , और शाम की ही बस लेनी थी मुझे , मुम्मा का फिर एक कॉल आया - निकल गए ? मैंने बोला नहीं मम्मी
मुम्म- हे भगवान् अभी  नहीं है ,
और हमेशा की तरह मै फिर सोचता सिर्फ आवाज सुन के हाल का पता , वाह क्या कमाल है
ऐसे तैसे - आवाज में थोड़ी जोर लगाई और धीमे ही कहा की - हाँ बस रेडी होक निकलना है अभी
3 तो बज  ही गए थे , तुरंत बैग पैक किये नहाये खाये और अपने हॉस्टल के पास के ही बस स्टॉप पे चला गया ,
 क्यूंकि यह हाईवे में था , बस के आने तक का वेट और गर्मी , यहां ठंडी के खत्म होने का ज्यादा इंतज़ार नहीं करते लोग , इधर फेब्रुअरी का दूसरा हफ्ता लगता और नारियल पानी , गन्ने जूस,लस्सी,छाछ ,आइसक्रीम एक ही जगह पर दर्जन भर दिख जाते है , एक गन्ने के जूस का ग्लास मैंने  लिया , टापरी के पास जाने ही लगा की बस आगयी।  शुक्र है सीट मिल गयी कंडक्टर के पास ही , और सामने लडकियां जो कंडक्टर के साथ काफी बातें कर रही थी , अब फ़ोन भी नहीं निकाल सकता था ,  गाने सुन ने के लिए ना फेसबुक व्हाट्सप्प चलाने के लिए , जिंदगी में बहुत पाप किये  पर  अपने ट्रेवल को फ़ोन के स्टोरी में समेटा , क्या पता था पुरे सफर की भी एक स्टोरी बन जानी है , 12 घंटे के सफर में घर पहुंचते तक चार्ज भी तो बचानी है , बस भी चलने लगी एक ही ऑप्शन था वो यह की धूल में धुंद नजारो में नजर डाला जाए इतने में ही ,एक दो पहिये वाले हट्टे   नवयुवक ने अपने शब्दों के बाण से कंडक्टर को चिल्लाने लगा , सवारी बैठाने के लिए ड्राइवर ने बस रोके थे और हॉर्न भी मारे
उसी समय इस नवयुवक की गाडी थोड़ी ज्यादा नजदीक हो गयी , जिससे उसके गाडी और उसके ड्राइविंग कुशलता थोड़ी झिझक गयी , गुस्से में चिल्ला चिल्ला के गाडी रुकवाने को  इतने बार बोले की सब पैसेंजर का ध्यान ही उसमे था , थोड़ी देर के लिए सब सन्नाटे में , शायद ये सन्नाट थोड़े देर के लिए नहीं था , ड्राइवर ने गाडी रोकी , और वो जवान युवक अपनी गाडी साइड में लगा के ड्राइवर की दरवाजे खोल के उसके कॉलर पकड़ के गुस्से में चिल्लाने लगा ,
कैसा गाडी चालाता है ,
साले मार डालेगा क्या ?
खड़े खड़े खरीद लूंगा तेरी बस
हॉर्न नहीं बजती क्या तेरे गाडी में ?

ड्राइवर ने कहा- हॉर्न दिया था आप सुने नहीं ,
वो फिर  चिल्लाने लगा - निचे आ हरामखोर चल तेरा कम्प्लेन कराता हुन्न बाप का सड़क है ?
कंडक्टर ने बिच बचाव किये और बोले - भैया जाने दो , वो हॉर्न बजाया था कॉलर छोड़ो और ,
ऐसे तैसे गहमा गहमी हुई उसने माफ़ी मांगने को कहा , ड्राइवर ने सॉरी कहा और धीमे धीमे गाडी फिर चालू करके निकल गए। ..

सब यात्रीगण शांत थे , ड्राइवर को अब उसके अपशब्द से शर्मिदा महसूस हुई , कोई गलती के लिए चिल्लाये तो बात ठीक भी है पर कोई नीचा दिखाए तो।
उन्होंने भी अपनी गाडी बढाई और आगे चलते बने , वो हमसे आगे ही चल रहा था , ड्राइवर ने कहा - होर्न दो तो सुनना नहीं है और गली गलौज करने आ जाते है , थोड़ी दूर एक और कंडक्टर बस में चढ़ा और शायद जो पहले था वो बिच में उतर गया , बस में कंडक्टर की जिंदगी भी अलग होती है आधे रास्ते में ही मंजिले बदलो , कभी आधे रास्ते में , कभी  घरो के पास ,

खैर ड्राइवर की बात करते है

ड्राइवर अब गुस्से में था , उसने कहा यही दबा के चला जाऊंगा पता भी नहीं चलेगा ऐसा बोलके बस की स्पीड बढ़ा दी क्यूंकि वो नवयुवक तो जस्ट आगे ही था ,
इतने में ही ड्राइवर के  पास वाले सीट में दो तीन अंकल ने उसे मनाये मत करो ऐसा , बढ़ी बुद्धि अम्मा ने भी बोले - छोड़ो ये सब हम सभी को अपने अपने घर जाना है , मत करो ऐसा
ड्राइवर ने सुन ली और बस ट्रैक में ले आये।  मुश्किल से 5 मिनट हुई थी यात्री अपने खुसर फुसर में थोड़े व्यस्त हुए ही थे की अब कंडक्टर ने कहा गाडी रोक भाई - अभी बताता हुन्न गाली दे रहा है मेको ,
ड्राइवर ने बस  रोकी , एक बड़ा पत्थर सामने सीट से निकाले और ,बस के चक्के के पीछे रख दिए , माहौल अब तो और गरम था , एक दो अंकल बस से उतरे और बस के पीछे समझौते करने गये , मैं तो इन सब चीजों का आदि नहीं था , हालाँकि शहर के ट्रैफिक ,छोटे दूकान से लेकर बड़े बड़े व्यापारी , यहां तो यह डेली के है , किसी से मार पिट कही गुस्सा हर दिन के वही चोचले ,ऐसे तो केस बहुत कम थे जिसमे टक्कर हुई ,तो झगड़े ना हो ,ना के बराबर ,
शहर में रह के आप मॉडर्न हो सकते है एक फेक शिष्टाचार बना सकते है , आमिर हो सकते है अपने सपनो की बुनियाद रख सकते है , पर  इन सब के बीच ऐसे फसे रहते है की विनम्रता , नार्मल ये सब चीजे बस एक शब्द बन जाती है बस एक शब्द ,,,

अच्छा हुआ माहौल शांत हुआ मैं सोचने लगा सफर की शुरआत में डायलॉग्स डिलीवरी हुई , दो लोग को एक मिनट में करीब से मेरे साथ दूसरे यात्रियों ने भी देखा , बड़े बुजुर्ग ,अंकल आंटी ने फिर समझाया और अब निकल पड़े रायपुर से , आधे दूर तक बस झगडे की ही चर्चा चली जिसमे एक दो लोगो ने अपने अपने विचार रखते गये

फिर से कमाल हुआ , जब झगड़ा हुआ तब कोई सामने नहीं आया , पहले वाले झगड़े में किसी ने भी ड्राइवर की तरफ कुछ भी नहीं बोले ,

खैर एक दो घंटे में अब मैं धमतरी पहुंच जाऊंगा नींद तो आने से रही ,

मुझे सफर का मजा इसलिए भी आता है की आप जीतने ज्यादा सफर करते है इस एक सफर में कई अलग अलग लोगो को उनके लाइफ के एक हिस्से को देखने का मौका मिलता है ,
साल दर साल बहुत कुछ बदला , पहले यात्री को दुकान से जाके खाने पिने का सामान लेना पड़ता था पर अब दूकानदार  या दूकान में काम करने वाले , सीधे बस में बैठे यात्री तक अपने सामान बेचने आ सकते है , इससे महिलाओ और बुजुर्ग को काफी फायदा हुआ , बस की टाइमिंग भी बस मिनटों तक रहती थी
यह एक टास्क की तरह चलता है ,
दस मिनट में पीछे महिंद्रा की गाडी आएगी और उस से पहले रॉयल को जाना पड़ेगा ,सँवारी को लेके बस वालो ने भी अपनी व्यस्था कर लिए है ,
कभी कभी इनके बिच भी टाइमिंग गड़बड़ी और हमारी सँवारी के झगड़े होते भी सुने है मैंने। 
कहा था ना , सफर एक अनुभव अनेक। ..

अब चलते है चारामा की ओर , नींद अब भी नहीं आयी मुझे पर अब थोड़ी से फ़ोन की नोटिफिकेशन चेक कर सकता हूँ मैं

मम्मी के तीन मिस कॉल उनसे बात करके बता दिए ,चारामा पहुंचने वाला हूँ

अचानक बिच में झपकी खुली मेरी।  एक फिर से जवान नवयुवक मेरी तरह एक अंकल को चिल्लाने लगा की हाथ कैसे लगाया तू ?

फिरसे। .. माहौल ???

क्या हो गया है इस देश को , कही गुस्सा कहीं धुंआ धुंआ ,
धीरे धीरे इनके बीच भी वाद विवाद होने लगे , एक दाम्पत्य जोड़े के साथ लड़ता हुआ एक युवक।  कंडक्टर ने आके पूछे हुआ क्या ?
तो अंकल ने बोले - वाइफ को छेड़ रहा है हाथ हटाने बोला तो समझा नहीं , ऊपर से भड़क रहा है।

उस लड़के के आँखों से लगता था किसी नशे का आदि है ,यह बात कंडक्टर भी समझ गया और उसे दूसरे जगह बिठा दिए ,

अब लगा की सच में आज का सफर तो तय था इन लोगो के साथ
पर क्युँ ?

चारामा बस स्टैंड में बस अंदर जाती उससे पहले ही 4 लड़के जोश में बोलते बोलते बस में घुस कर कहने लगे -
कौन मारा भाई को ?
कौंन हाथ लगाया ?
और इसी समय उस अंकल की वाइफ ने उन्हें कवर कर  लिए उनके आगे आगयी ,

अब कंडक्टर और बस ड्राइवर अपनी संपत्ति में में दुसरो के होशियारी कैसे देखते ,
ड्राइवर-ने बस रोकी बाकी यात्री जिन्हे उतरना था वो उतर गए
कंडक्टर और बस ड्राइवर ने सबको निचे उतारे ,उन्हें दो लाइन सारी बता दी की -तेरा दोस्त नशे में छेड़ रहा था ले जा नहीं तो सामने में है थाना ,
चारामा बस स्टैंड के सामने में ही थाना है जहां मैं भी कई बार गया हूँ इसकी कहानी कभी और ,,

लड़के शांत हो गए और गलती बिना माने चले गये
पीछे फिर खुसर फुसर में सुनाई दिए की
लड़का कॉल करके पहले से बुला लिआ था अपने दोस्तों को ,,,

जो भी हुआ उन सब में एक चीज जो सबको जोड़ती थी वो थी उम्र

बस ड्राइवर की उम्र ,रायपुर रोड में हट्टा कट्टा ,बस बेचने की औकात रखने वाला नवयुवक ,चारामा में अपनी यारी को आजमाता लड़को का ग्रुप , सब २० सी 28   उम्र के थे ,

और जो दूसरी है वो अब आम है - कुंठित मन और गुस्सा। 



















Thursday, March 26, 2020

मंज़र थोड़े तबाह से - 2020




रूस  का भूकंप 
शहीद होते जवान 
काबुल के आतंकी हमले 
और वायरस के मुँह में आधा जहान 
बंद हो गए कारोबार सारे 
खेतों को भूखा है किसान 
धुंए से मिली चंद दिनों की आजादी 
कयोंकि गाड़ियां  हो गयी है जाम 
दुगनी रफ़्तार में हो रही है मौते 
थम गया है सब और सबकी नींदे 
डर है जिम्मेदारी है 
इतनी हावी 
भविष्य को लेकर है सब हैरान 
कहीं लोग घर में हंस खेल रहे 
कहीं घुट कर जिंदगी ख़तम हो रही 
कल तक जो था खुद का मालिक 
आज शायद लाचार है इंसान ?? 

तब्दील हो गयी तस्वीरें धीरे धीरे अमेजन की राख से 
रुख हवा का फैक्ट्रियों से साँस की तरह लगा रखा था 

कट रहे थे हरियारी विकास के नाम पे 
अरे उसने ही तो बचा रखा था 

सुनामी धरती के वो आंसू है 
और वायरस उसके सीने  में पलता  गंध 

हम इंसानो की अपनी बर्बादी अलग 
हमने तो खुद से ही छेड़ रखी है जंग 

पृथ्वी ही बीमार है हम कैसे बचेंगे 
मिला निवारण ऐसा 
खुद को आईसोलेट रखेंगे। 






(आईसोलेट-अलग करना )

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Sunday, March 22, 2020

खैरियत





हमें मुन्तजिर था की हमारी खैरियत पूछी जायेगी 
खबर क्या थी की हमसे हमारी गुस्ताखी पूछी जाएगी 

बेसबब को मुलाकात ही जरिया बना जब भी 
इत्तेफ़ाक़-ए-फ़क़त हमसे सिर्फ लिहाजे पूछी जाएगी 

हुनरमंद तो नहीं बस अलफ़ाज़ के ठिकाने मिले 
कसम वादों में बेक्कार ही परवाने मिले 

रसूख था बस इश्क़ का ,महरूम ने ऐतबार रखी 
जहन में मक्कार लिए उन्होंने अपनी  आगाज़ रखी  

वो गैर थे गैर ही रह गए ,किसी लफ्ज़ के शोख थे 
सुकून की फ़रियाद उनकी अब बेवजह हो जाएगी । 

नैनो की पीरह



नैनो की नम पीरह  पढ़ी नहीं जाती 
जिस्म से ही बस जिन्दा क्यों है लोग 

चीखता ही रह जाता है मासूम आवाज कहीं 
बेमतलब  के शोर में खुश क्यों है लोग 

ये विधान है क्या कोई 
ये विधान है क्या कोई 

इनमे इल्म तो दिखता नहीं 
जरुरी है  कठोर हो जाना गर

तो 

नम करती नैनो को, वो पिरह 
रखते क्यों है लोग ??